बिदअतियों (धर्म में नई चीज़ें बनाने वालों) की पिटाई की घटना के बाद दिल बहुत उदास हो चुका था. क्योंकि मैंने इस घटना में अपने ज़माने के अपने कई जानने वालों को देखा था. मेरी तबियत बहाल करने के लिए सालेह मुझे वापस होज़े कौसर की ओर ले गया था. वहां के पुरफिज़ा माहौल में कुछ समय एकांत और मौन में बिता कर मैं बेहतर हो गया तो वो मुझे मैदान में ले आया.
रास्ते में मुझे बताने लगा कि जब हम यहां थे तो उस अरसे में सारे नबियों की गवाही का काम पूरा हो गया. जिसके बाद सामान्य हिसाब किताब का दौर शुरू हो चुका था. इसकी शुरुआत भी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत से हुई जिसका बड़ा हिस्सा हिसाब किताब से गुजर कर अपने बारे में खुदा का फैसला सुन चुका है.
' इसका मतलब यह हुआ कि एक बहुत महत्वपूर्ण अवसर पर मैं यहाँ नहीं था?'
''हां ऐसा ही है, लेकिन जन्नत में जाने के बाद जब चाहो, इस हिसाब किताब की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग देख सकोगे.'' उसने हंसते हुए मेरी बात का जवाब दिया.
'मगर भाई लाइव तो लाइव ही हुआ करता है.' मैंने भी मुस्कुराते हुए उसकी बात का जवाब दिया.
'' एक बड़ी दिलचस्प बात जो यहाँ हुई वह मैं तुम्हें बता देता हूँ. हुआ यह कि जब रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत के मुशरिकीन (खुदा का साझी करार देने वाले) को उनके शिर्क पर पकड़ा गया तो एक बड़ी संख्या ने इनकार कर दिया कि वह किसी शिर्क से ग्रस्त थे. इनकार करने वालों में बाद के युग के लोग ही नहीं मक्का के काफ़िर (इन्कार करने वाले) भी थे जो बुतों की पूजा करते थे.''
'इसकी क्या वजह रही?'
'' इसकी वजह यह थी कि आज सब ने अपनी आंखों से देख लिया है कि खुदा के अलावा किसी के हाथ में कुछ नहीं है. उन लोगों ने पहले पहल तो देवी देवताओं और पूर्वजों को पुकारा और उन्हें खोजा. ज़ाहिर है की न कोई था और न किसी ने जवाब देना था. फरिश्तों और नेक बुजुर्ग, जिन्हें खुदा को छोड़ कर पुकारा जाता था, उन्होंने तो उन लोगों के शिर्क से साफ़ इनकार कर दिया था. इसके बाद एक ही चारा बचा था कि लोग अपने शिर्क का इनकार करदें, लेकिन जाहिर है इसका कोई फायदा नहीं हुआ. ऐसे सभी अपराधियों के लिए नरक का फैसला हो गया.''
' इस समय किसका हिसाब किताब हो रहा है?' मैंने पूछा.
'' इस समय तुम्हारे ज़माने के लोगों का नंबर आ चुका है. इसलिए मैं तुम्हें यहाँ ले आया हूँ. तुम देख सकते हो कि एक एक करके लोग हिसाब किताब के लिए बुलाए जा रहे हैं. हर व्यक्ति दो फरिश्तों के साथ बारगाह इलाही में पेश होता है. एक फरिश्ता पीछे चलता और अपनी निगरानी में उसे अर्श तक पहुंचाता है जबकि दूसरा फरिश्ता आदमी के साथ उसका आमाल नामा (कर्मों का खाता) उठाए चलता है. इनमें से पीछे वाले फरिश्ते को 'साइक' और आमाल नामे के साथ चलने वाले को 'शहीद' कहा जाता है. साइक, वह फरिश्ता है जो आदमी को हष्र के मैदान से अर्श इलाही तक पहुंचाने का ज़िम्मेदार है जबकि 'शहीद' उसके आमाल (कार्यों) की गवाही देता है. यह वही दो फ़रिश्ते हैं जो जीवन भर इंसान के दाएं और बाँई ओर मौजूद रहे. दाहिने वाला नेक काम और बाएं वाला बुरे काम लिखता था. उन्हें कुरआन में 'किरामन कातिबीन' कहा गया था.''
'मगर यहां आकर उनमें से कौन साइक और कौन शहीद बनता है?' मैंने पूछा.
'' यह सिर्फ खुदा को पता होता है. वही बन्दे के पेश होने से पहले किरामन कातिबीन को खबर करता है कि दोनों में से किस को क्या करना है.''
हम वहां पहुंचे तो एक सरकारी अफसर खुदा की बारगाह में पेश था. उससे पूछा गया:
'' क्या काम किया?''
उसने डरते हुए जवाब दिया:
'' परवरदिगार (भगवन) मुझ से ज़िन्दगी में कुछ गलतियां हुई थीं, लेकिन बाद में मैंने तेरे लिए इबादत और तस्बीह की. ज़िन्दगी तेरे दीन के लिए खर्च कर दी.''
इसी बीच में उसके साथ खड़े फरिश्ते को इशारा हुआ. उसने कहा:
'' परवरदिगार! इसने सच कहा है.''
पूछा गया:
'' तुम एक सरकारी कर्मचारी थे. क्या तुमने रिश्वत ली? लोगों को तंग करके उनसे पैसे खाए. अवैध रूप से कानून सख्त करके लोगों को रिश्वत देने के लिए मजबूर किया?''
उसने कहा:
'' यह मैंने किया था लेकिन मैंने तौबा कर ली थी.''
'' तू ने तौबा कर ली थी?, बहुत ग़ज़बनाक आवाज़ में पूछा गया.''
उसके मुँह से जवाब में एक शब्द नहीं निकल सका. फरिश्ता आगे बढ़ा और उसने उसके आमाल नामे को पढ़ना शुरू किया. जिसके अनुसार उसने हराम की कमाई से घर बनाया सारी ज़िन्दगी उसी घर में रहा, निवेश करके उस माल को खूब बढ़ाया, बच्चों को इसी पैसे से उच्च शिक्षा दिलवाई. पत्नी को खूब गहने बनाकर दिए. यह माल से अपनी मौत तक फायदा उठाता रहा. लेकिन मुंह से तौबा जरूर की थी और रिटायरमेंट के बाद दाढ़ी, टोपी, नमाज़ आदि शुरू कर दी थी.
जैसे ही फरिश्ते की बात खत्म हुई हुक्म हुआ:
'' इसका आमाल नामा तराजू में रखो.''
दाएँ हाथ के फरिश्ते ने उसकी नेकियाँ अलग करके इन्साफ की तराजू में दाहिने तरफ रख दीं और बाएं हाथ के फरिश्ते ने उस की बुराईयां बाईं तरफ रख दीं. वह सरकारी अफसर बहुत बेबसी और डर के साथ यह सब होता देख रहा था.
फरिश्तों ने अपना काम जैसे ही खत्म किया परिणाम सामने आ गया. बाएँ हाथ का पलड़ा पूरी तरह झुक गया था. उसने जुल्म, अन्याय और रिश्वत से जो हराम कमाया था और लोगों के साथ जो ज्यादतियां की थी वह उसके सारे नेक आमाल (अच्छे कामों) पर ग़ालिब आ गया. यह देखकर वह आदमी चीखने चिल्लाने लगा और रहम की भीख मांगने लगा.
इरशाद हुआ:
'' जिन लोगों से तू रिश्वत लेता और उन्हें तंग करता था कभी उन पर तुझे रहम आया. देख तेरी कमाई आज तेरे कुछ काम न आई. तेरा अंजाम जहन्नम (नरक) है.'' फिर एक फरिश्ते ने उसका आमाल नामा उसके बाएं हाथ में थमादया.
वह आदमी चीख चीख कर कहने लगा:
''मैंने अपने लिए कुछ नहीं किया. यह सब मैंने अपनी बीवी बच्चों के लिए किया था. अल्लाह के लिए मुझे छोड़दो. मेरे बीवी बच्चों को पकड़ो.''
फरिश्तों ने जवाब दिया:
'' तेरे बीवी बच्चों का हिसाब भी हो जाएगा पहले तू तो चल.''
फिर दोनों फ़रिश्ते उसे मारते और घसीटते हुए जहन्नम की ओर ले गए.
...............
अगला व्यक्ति पुलिस का एक वरिष्ठ अधिकारी था. खुदा ने उसके साथ आने वाले फरिश्ते से पूछा कि उसके आमाल नामे में क्या दर्ज है. इसके जवाब में फरिश्ते ने उसके सारी ज़िन्दगी के जुर्म बयान कर दिए . जिनमें निर्दोष लोगों पर अत्याचार, कुछ मासूमों का क़त्ल, जुए और फहाशी के अड्डों को चलवाना, फहाशी और शराब पीने, रिश्वत और अय्याशी जैसे बड़े जुर्म शामिल थे. जबकि नेकियों में केवल ईद की वह नमाज़ थी जो मजबूरी में बड़े लोगों के साथ ईदगाह में अदा की जाती थीं.
पूछा गया:
'' तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है.''
उसने कहा:
'' परवरदिगार! मेरे हालात ही कुछ ऐसे थे. हर तरफ रिश्वत का माहौल था. यह सब नहीं करना चाहता था लेकिन अधिकारियों का दबाव और हालत की मजबूरी के आधार पर मैं मजबूर हो गया.
बहुत सख्त आवाज़ में कहा गया:
'' तो तुम मजबूर हो गए थे?''
फिर हुक्म हुआ कि उसके साथ काम करने वाले एक जूनियर अफसर को पेश किया जाए. थोड़ी ही देर में एक बहुत खुश शक्ल आदमी बहुत अच्छे कपडे पहने हुए हाज़िर हुआ. उससे पूछा गया:
''मेरे बंदे तू ने भी पुलिस में काम किया. फिर माहौल से मजबूर होकर अत्याचार और रिश्वत का रास्ता क्यों नहीं अपनाया?''
उसने जवाब दिया:
''मेरे रब मुझे आज के दिन तेरे हुज़ूर पेश होने का अंदेशा था. इसलिए मैंने कभी रिश्वत नहीं ली. जब साथ काम करने वालों ने मुझे मजबूर किया तो मैंने इनकार कर दिया. मैंने सारी उम्र गरीबी में ज़िन्दगी गुज़री लेकिन कभी पैसे लेकर इन्साफ का खून नहीं किया.''
जवाब मिला:
'' हाँ! उसी का बदला है तेरे बहुत कम अमल (कर्म) को मैंने बहुत ज्यादा क़ुबूल किया है और तुझे इज्ज़त के साथ हमेशा रहने वाली जन्नत नसीब की है.''
फिर दूसरे पुलिस वाले से कहा:
'' तेरे पास चुनाव यह नहीं था कि तू रिश्वत, अत्याचार और ज़ुल्म के रास्ते पर चले या गरीबी की ज़िन्दगी बिताए. तेरे पास चुनाव यह था कि तू ज़ुल्म करे या जहन्नम में जाए. सो तू ने जहन्नम को पसंद किया. यही हमेशा के लिए तेरा बदला है.''
वह पुलिस वाला हार मानने को तैयार न था. वह रोते हुए कहने लगा:
'' परवरदिगार! मुझे शैतान ने गुमराह किया था.''
जवाब मिला:
'' नहीं! असल में तो तू खुद एक शैतान था. हालांकि तू मेरे सामने एक मामूली चूंटी से भी कमज़ोर था. ऐ नीच इंसान! जिस समय तू इंसानों पर ज़ुल्म करता था तब भी मेरे सामने होता था, लेकिन मैंने तुझे मोहलत दी. तूने उस मोहलत का फाएदा नहीं उठाया. तू यह समझा था कि तुझे मेरे सामने पेश नहीं होना. देख तेरा सोचना गलत साबित हुआ.
इधर गुस्से के यह शब्द गूँज रहे थे, उधर हष्र के मैदान के बाईं ओर जहन्नम के शोलो के भड़कने की आवाज़ें तेज हो रही थीं. इन आवाज़ों ने हर दिल को लरज़ा कर रख दिया था. हर इंसान पर कड़ी वहशत तारी थी . कलेजे मुँह को आ रहे थे. आंखें फटी हुई थी. लोगों के चेहरे एकदम काले पड़ चुके थे. दिलों की धड़कनें इतनी तेज थी कि मानो दिल छाती तोड़ कर बाहर निकल आएँगे. लेकिन आज भागने की कोई राह न थी. एक मुजरिम का फैसला हो रहा था और बाकि मुजरिमों की हालत खराब हो रही थी. अपने समय के फ़िरऔन, शक्तिशाली हस्तियां, जब्र करने वाले शासक, बेहद माल के खजानो के मालिक, सबसे प्रसिद्ध सैलेबरेटी, बहुत प्रभाव वाले लोग सबसे छोटे दासों बल्कि भेड़ बकरियों की तरह बेबसी से खड़े अपनी किस्मत के फैसले के इन्तिज़ार में थे और आज उन्हें बचाने वाला कोई नहीं था.
फिर उसका आमाल नामा तौला गया और जैसे कि उम्मीद थी बाएँ हाथ का पलड़ा भारी हो गया. फरिश्ते ने आगे बढ़कर आमाल नामे को उसके बाएं हाथ में थमाना चाहा, मगर उसने डर के मारे हाथ पीछे कर लिया. फरिश्ते के मुकाबले में उसकी क्या हैसयत थी. फरिश्ते ने उसके हाथ पीछे ही बांधकर उनके बंधे हुए हाथों में से बाएँ हाथ में आमाल नामा थमा दिया. फिर दोनों फ़रिश्ते उसे मारते पीटते उन शोलों की ओर बढ़ गए जहां बहुत बुरा अंजाम उसका इन्तिज़ार कर रहा था.
...............
अगला आदमी एक अमीर आदमी था. पूछा गया:
'' दौलत के खजाने तो पीछे छोड़ आये हो. यह बताओ कि माल कैसे कमाया और कैसे खर्च किया था?''
उसने जवाब दिया:
'' परवरदिगार! मैं व्यापार करता था. उससे जो माल कमाया वह गरीबों पर खर्च किया.''
फरिश्तों को इशारा हुआ. उसने विवरण करना शुरू किया जिसके अनुसार इस आदमी ने ज़िन्दगी में खरबों रुपये कमाए. ज़िन्दगी के शुरू में छोटे व्यवसाय से शुरुआत की. चीनी, आटा और दूसरी बुनियादी जरूरत की चीज़ों में मिलावट की और भंडार आदि करके बहुत लाभ कमाया और उसका व्यापार तेजी से फैल गया. इसके बाद उसने कई और व्यापार कर लिए. मगर इस बार माल कमाने के लिए उसने अपने जैसे कई अन्य लुटेरों को साथ मिलाकर एक कार्टल बना लिया. कार्टल का काम ही यह था कि बाजार को कंट्रोल करके अपनी मर्ज़ी की कीमत पर चीजें बेची जाएं. यह कार्टल जिसमे बहुत अमीर लोग शामिल थे अपने राजनीतिक संपर्कों और रिश्वत के ज़रये अपनी मर्ज़ी की कीमत तय कराता था. यूँ गरीब जनता महंगाई की चक्की में पिसती रही और इनका निवेश करोड़ों से अरबों और अरबों से खरबों में बदलता गया. समाज में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए अपने खजाने में से कुछ दान करता और ढेरों वाह वाही कमाता.
फरिश्ते की बात के बाद कुछ कहने सुनने की गुंजाइश खत्म हो गई, मगर यह सेठ बहुत चालाक आदमी था. उसने चीख चीख कर कहना शुरू कर दिया कि यह सारा बयान बिल्कुल गलत है. मैंने कोई गलत काम नहीं किया. मैंने सब कुछ कानून के अनुसार किया है. बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार व्यापार किया. मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है. यह फरिश्ता झूठ बोल रहा है. वह लगातार चीखे जा रहा था.
आवाज़ आई:
'' तो तुझे सबूत चाहिए. वह भी मिल जाएगा.''
इन शब्दों के साथ ही सेठ की आवाज़ बंद हो गई. अचानक उसके हाथ से आवाज आना शुरू हो गई. लगभग वही बयान दोहरादया गया जो फरिश्ते ने दिया था. फिर ऐसी ही गवाही उसके पैरों से आना शुरू हो गई. और धीरे धीरे पूरे शरीर ने उसके खिलाफ गवाही दी. यहां तक कि उसके सीने ने उसके दिल की वह नियत भी बयान करदी जो फरिश्तों के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थी.
इस गवाही के बाद कहने सुनने की सारी गुंजाइश खत्म हो गई और वही अंजाम सामने आ जो पिछलों के सामने आया था. एक अतिरिक्त बात हुई वह यह कि फरिश्तों को हुक्म हुआ कि जहन्नम में दुसरे अज़ाबों के साथ उसके माल और खजाने को आग में दहकाया जाए और उसकी पीठ, उसके माथे और उसकी कमर को बार बार दागा जाए. इसके बाद फरिश्ते उसे मुंह के बल घसीटते हुए जहन्नम की ओर ले गए.
...............
एक एक करके लोग आते जा रहे थे और उनके मामलों निपटते जा रहे थे. कुछ लोगों का मामला बड़ा ही भयानक था. इनमें से पहला आदमी आया तो लगा कि उसके आमाल नामे में नेकियों के पहाड़ हैं. इबादत, रियाज़त, तस्बीह, नमाज़, रोज़ा, जकात, हज और उम्रों की लम्बी लाइन थी जो उसके आमाल नामे से ख़त्म नहीं हो रही थी. मगर उसके बाद फरिश्ते ने इसके आमाल नामे में उन कामों को पढ़ना शुरू किया जिनका संबंध लोगों के साथ था तो पता चला कि किसी को गाली दी है, किसी का माल दबाया है, किसी पर तोहमत लगाई है, किसी को मारा पीटा है. इस पर बारगाहे इलाही से फैसला हुआ कि सारे मज़लूमों को बुला लो जिन जिन पर इस ने ज़ुल्म किया है. इसके बाद हर मज़लूम को उसके हिस्से की नेकियाँ दे दी गई. यहाँ तक के उसकी सारी नेकियाँ ख़त्म हो गई. पर कुछ मज़लूम फिर भी रह गए तो हुक्म हुआ कि उनके गुनाह इसके खाते में डाल दो. इसके बाद जब आमाल का वज़न तौला गया तो बाएँ हाथ का पलड़ा बिल्कुल झुक गया. वह आदमी चीख़ता चिल्लाता रहा मगर उसकी एक न चली और फरिश्ते उसे खींचते हुए जहन्नम की ओर ले गए.
कुछ लोग ऐसे आए जिनका अंजाम देख कर मुझे अपनी चिंता होने लगी. उनमें से एक आलिम (ज्ञानी) था. वह पेश हुआ तो खुदा ने उसे अपनी सारी नेअमतें याद दिलाई जो दुन्याँ में उसको दी थी, और फिर उससे पूछा कि तुमने जवाब में क्या किया. उसने अपने इल्म (ज्ञान) और लोगों को दीन की दावत देने के कारनामे सुनाने शुरू किए. जवाब में उससे कहा गया कि तू झूठ बोलता है. तूने यह सब इसलिए किया कि तुझे लोग आलिम कहें. सो दुनिया में कह दिया गया. फैसले का नतीजा साफ था. इस पर फरिश्ते उसे भी मुँह के बल घसीटते हुए जहन्नम की ओर ले गए. ऐसा ही मामला एक शहीद और सखी (गरीबों को खूब देने वाला) के साथ हुआ. उनसे भी वही सवाल हुआ. उन्होंने भी अपने कारनामे सुनाए. लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि तुमने जो कुछ किया दुनिया में लोगों को दिखाने और उनकी नज़रों में ऊँचा स्थान पाने के लिए किया. सो वही प्रशंसा तुम्हारा बदला है. तुमने न मेरे लिए कुछ किया ना ही मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ है. उन्हें भी जहन्नम की ओर रवाना कर दिया गया. उन लोगों का हिसाब किताब हो रहा था और मैं अपना हिसाब लगा रहा था कि मैंने कितने काम अल्लाह के लिए किए और कितने लोगों की नज़रों में ऊँचा और बड़ा बन्ने के लिए.
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