बुधवार, 25 जुलाई 2012

आखरी भाग


                                                   अबू याह्या की कलम से 


प्रिय पाठकों 
यह कहानी अगर आप ने पूरी कर ली है तो उम्मीद है कि ज्यादा तर पाठकों की तरह आपके लिए भी एक नई दुनिया का परिचय साबित हुई होगी. लेकिन मेरी तमन्ना है कि यह नॉविल आप के लिए सारे आलम के रब की आखरी किताब का भी एक नया परिचय बन जाए.
मैंने जो कुछ लिखा है वह कुरआन और हदीसों के बयानों और संकेत वजाहतों (विवरण) में लिखा है. अल्लाह बदले के दिन का मालिक है. जन्नत (सुवर्ग) असल कामयाबी है. जहन्नम (नरक) का अज़ाब असल विफलता है. दुनिया का जीवन थोड़ा और धोखा है. इन्सानयत की आखरी कामयाबी सिर्फ ईमान (ईश्वर पर यकीन) और नेक आमाल (कर्म) की कुरानी दावत (पुकार) की पैरवी (पालन) में है. यही सब नबियों की दावत और कुरआन का सार है. मुझे विश्वास है कि इस उपन्यास को पढ़ने के बाद जब आप कुरआन को समझ कर अनुवाद के साथ पढ़ेंगे तो कुरान मजीद के बयान के मायने बड़ी हद तक आप पर स्पष्ट होने लगेंगे. कुरान आपके लिए अनदेखी दुनिया का नहीं बल्कि एक जानी पहचानी दुनिया का परिचय बन जाएगा. यदि आपने कुरआन को इस तरह पा लिया तो यह मेरी सबसे बड़ी सफलता होगी.
उम्मीद है कि इस नॉविल के पढ़ने के बाद आप कम से कम एक बार पूरे कुरआन को अनुवाद के साथ पढ़ने की कोशिश जरूर करेंगे.
अच्छी उम्मीद के साथ खुदा हाफिज़ 
अबू याह्या
abu.yahya786 @ gmail.com
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                                                            मेरी कलम से 


प्रिय पाठकों 
मुझे अपने भाषा का ज्ञान कम होने का पूरा हसास है, मैं इस अनुवाद में होने वाली गलतियों की पूरी जुम्मेदारी लेता हूँ, अगर भाषा की वजह से कोई बात गलत समझ ली गई है तो उसका भी जुम्मेदार सिर्फ मैं हूँ. इस अनुवाद में कुछ कमी हो सकती है इस लिए जो लोग उर्दू पढ़ सकते हैं वे इस किताब को उर्दू ही मैं पढ़ें.
अगर आप को ये जरा भी पसंद आई है तो अपने सभी दोस्तों को इस ब्लॉग का लिंक ज़रूर दें और मेरी तरफ से उनसे इसको पढ़ने का अनुरोध करें, के अच्छी बात फैलाना भी सदका (दान) है.
(नोट: इख्तिलाफ के दरवाज़े खुले हैं झिजक महसूस ना करें)
हदीस= ''मेरी उम्मत का इख्तिलाफ मेरी उम्मत के लिए रहमत है ''
दुआओं में याद रखें, खुदा हाफ़िज़ वस्सलाम.
मुशर्रफ अहमद 
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